
भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् की स्थापना शिक्षा मंत्रालय ने 1977 में एक समिति की अनुशंसा पर की, जिसने ICSSR और ICHR की तरह केवल दर्शनशास्त्र के लिए एक संस्था की आवश्यकता अनुभव की थी। परिषद् ने 1981 में अपने संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डी.पी. चट्टोपाध्याय के नेतृत्व में कार्य आरम्भ किया।
नई दिल्ली स्थित दर्शन भवन और लखनऊ स्थित शैक्षणिक केन्द्र से परिषद् अध्येतावृत्तियों और परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देती है, विश्वविद्यालयों को संगोष्ठियाँ और व्याख्यान आयोजित करने में सहयोग करती है, पुस्तकें और जर्नल ऑफ़ इंडियन काउंसिल ऑफ़ फ़िलॉसॉफ़िकल रिसर्च प्रकाशित करती है तथा दर्शनशास्त्र का विशिष्ट पुस्तकालय संचालित करती है।
i.ऐतिहासिक परिचयपरिषद् की स्थापना की कथा: 1977 के संगम-ज्ञापन से दर्शन भवन और लखनऊ शैक्षणिक केन्द्र तक।
ii.अधिदेश एवं संगम-ज्ञापनपरिषद् के उद्देश्य और नियम।
iii.शैक्षणिक केन्द्र, लखनऊलखनऊ स्थित परिषद् का शैक्षणिक केन्द्र एवं दर्शनशास्त्र पुस्तकालय, 1983 से कार्यरत।
iv.पुस्तकालयलगभग 30,000 पुस्तकों और सौ से अधिक पत्रिकाओं वाला दर्शनशास्त्र का विशिष्ट पुस्तकालय।