भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् की स्थापना 1977 में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक स्वायत्त संस्था के रूप में की गई, ताकि भारतीय दर्शन की सम्पूर्ण परम्परा को उसके मूल स्वरूप में पुनः प्रतिष्ठित किया जा सके और शोध के गहन कार्यक्रमों के माध्यम से नए चिंतन को प्रोत्साहन मिले।
1977 से 1981 तक कार्य की गति धीमी रही; 1981 में प्रो. डी.पी. चट्टोपाध्याय के संस्थापक अध्यक्ष नियुक्त होने के साथ परिषद् ने कार्य आरम्भ किया। दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा 36 तुगलकाबाद संस्थागत क्षेत्र में आवंटित भूमि पर 1990–1996 में परिषद् का भवन बना, जिसका उद्घाटन 1999 में हुआ।
लखनऊ स्थित शैक्षणिक केन्द्र 1983 से कार्यरत है, जहाँ दर्शनशास्त्र का एक विशिष्ट पुस्तकालय है।